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गुटखा

गुटखा
रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015

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वक़्त

वक़्त 

 
वक़्त का गुलाम है ये आदमी 
वक़्त का नवाब भी है ये आदमी
आदमी ही सत्य को पहचानता 
आदमी ही धर्म को है मानता 
जानता है राम को ये आदमी
वक़्त का गुलाम है ये आदमी 
आदमी ही झूठ को तराशता
आदमी ही सत्य को नकारता 
स्वीकारता है “काम” को ये आदमी 
वक़्त का गुलाम है ये आदमी 
आदमी ही आदमी को मारता 
आदमी ही जिंदगी संवारता 
वीरता का नाम भी है आदमी 
वक़्त का गुलाम है ये आदमी 
आदमी ही आइना समाज का 
वो रक्षक भी है नारी की लाज का
यहाँ भी बदनाम है यह आदमी 
वक़्त का गुलाम है ये आदमी 
आदमी ही कायरता का रूप है 
आदमी ही मौत का स्वरूप है 
रूप है भगवान का ये आदमी 
वक़्त का गुलाम है ये आदमी 
   वक़्त का नवाब भी है ये आदमी
रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015

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मुझे छू ना ना सनम

मुझे छू ना ना सनम

मुझे छू ना ना सनम, तुझे तेरी जान की कसम 
मेरी जान की कसम, मैं मर जाऊँगी, हाय मैं मर जाउंगी
मेरे दिल की धड़कन बढ़ती 
मेरी साँस तेज़ सी चलती 
ना नज़र तेरे से हटती, मैं मर जाऊँगी, हाय मैं मर जाउंगी
ना दिल पे काबू रहता 
मेरा जोबन दरिया बहता 
मेरा रोम रोम ये कहता, मैं मर जाऊँगी, हाय मैं मर जाउंगी
जब प्रेम ज्वाला सुलगे,
साँसों की लड़ियाँ उलझे 
प्रेम बीज़ जब उपजे, तो मैं मर जाऊँगी, हाय मैं मर जाउंगी
रचयिता : आनन्द कवि आनन्द कॉपीराइट © 2015
 

मुझे छू ना ना सनम

 

 
 

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